हिन्‍दी भाषियों के हिन्‍दी प्रेम की विडम्‍बना

Ajay Singh Rawat/ March 14, 2025
हिन्‍दी

इन दिनों एयरटेल की एक कर्मचारी और एक मराठी युवक की हिन्‍दी को लेकर आपसी बहसबाजी सोशल मीडिया में बहुत छाई हुई है। जहां जहां यह वीडियो दिखाया जा रहा है वहां वहां हिन्‍दी के कई समर्थक “अंगरेज़ी “ टिप्‍पणियों या रोमन हिन्‍दी में लिखी हिन्‍दी टिप्‍पणियों द्वारा अपने विचार व्‍यक्‍त कर रहे हैं।
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हाल ही में अजिंठा की गुफाएं निहारने के बाद जलगांव से आती हुई बस में बैठकर छत्रपति संभाजी नगर अथवा औरंगाबाद जाते समय मुझे भी मराठी न आने के कारण एक असहज स्‍थिति का सामना करना पड़ा। बस संचालक ने मुझसे मराठी में पूछा कि मैं कहां से बैठा हूं तो मुझसे जवाब देते न बना। कातर भाव से उससे हिन्‍दी में बोलने का निवेदन किया तो उसकी त्‍यौरियां चढ़ गई। उसने कुछ कहा तो नहीं किंतु थोड़ी देर बाद मुझे पीछे जाने के लिए उसने रूखे स्‍वर में कहा, “ऐ भइया, पीछे जाकर खड़े हो।” यद्यपि हिन्‍दी का शब्‍द भइया मराठी के भाऊ शब्‍द का ही समानार्थी है फिर भी इसमें तिरस्‍कार की चुभन को महसूस किया जा सकती थी। अस्‍तु, मुझे वहां आए एक ही दिन हुआ था और मैं एक पर्यटक ही था। भविष्‍य में ऐसी स्‍थिति का सामना करने के लिए भी मैंने कम से कम,”मला मराठी येत नाही” अर्थात् “मुझे मराठी नहीं आती,” इतना तो याद कर लिया है। वैसे इससे पहले भी नागपुर में मैं एक मराठी वाक्‍य सीख चुका था, “मला जाऊ द्या” अर्थात् मुझे जाने दो। वादिम पेरेलमान द्वारा निर्देशित फिल्‍म “पर्शियन लैसन्‍स” किसी भाषा के एक शब्‍द मात्र को भी सीख लेने के महत्‍व को बखूबी दर्शाती है।
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जब किसी राज्‍य में हिन्‍दी का विरोध होता है तो हिन्‍दी भाषी लोग सोशल मीडिया पर “हिन्‍दी हमारी राष्‍ट्रभाषा है” का राग अलापने लगते हैं। लेकिन इनमें से कितने लोग हैं जो हिन्‍दी दिवस मनाते हैं? जिनके घर में हिन्‍दी का शब्‍दकोश रखा है? जो हिन्‍दी साहित्‍यिक पत्र पत्रिकाएं पढ़ते हैं? हिन्‍दी में हस्‍ताक्षर करते हैं? सामाजिक माध्‍यमों पर हिन्‍दी लिपि में लिखते हैं? अपने बच्‍चों को हिन्‍दी पाठशालाओं में भेजते हैं? उन्‍हें “जॉनी जॉनी यस पापा” या “ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्‍टार” के बजाय हिन्‍दी की कविताएं सिखाते हैं? अपने माता पिता को मम्‍मी पापा के बजाय मां बाबूजी कहते हैं? अपने प्‍यार का इजहार “आई लव यू” कहकर नहीं करते हैं? प्‍लीज़, सॉरी या थैंक्‍यू के बजाय कृपया, क्षमा कीजिए या धन्‍यवाद कहते हैं? अपने घर या दुकान की नाम पट्टिका हिन्‍दी में लिखवाते हैं?
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कटु सत्‍य तो यह है कि दूसरी प्रादेशिक भाषाओं की तरह हिन्‍दी भी एक धीमी मौत मर रही है। हिन्‍दी भाषी राज्‍यों में भी हिन्‍दी को पिछड़ेपन की भाषा माना जाने लगा है। इसका उत्‍कृष्‍ट उदाहरण राजस्‍थान में कांग्रेस द्वारा सरकारी हिन्‍दी माध्‍यम विद्यालयों को महात्‍मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्‍कूलों में बदला जाना है जबकि स्‍वयं गांधीजी मातृभाषा में शिक्षा का पुरजोर समर्थन करते थे। विद्यालयों में हिन्‍दी की क्‍या स्‍थिति है यह जानने के लिए किसी निजी विद्यालय में जाइए जहां अंगरेजी की अध्‍यापिका सबसे स्‍टाइलिश मिलेगी और हिन्‍दी की सबसे साधारण। जाहिर सी बात है हिन्‍दी तो कोई भी पढ़ा सकता है, इसलिए जो सबसे कम वेतन में राजी हो जाए उसे ही काम पर रख लिया जाता है। हिन्‍दी पढ़ाने की अनिवार्यता न हो तो ये विद्यालय शिक्षकों को रखेंगे ही नहीं।
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हिन्‍दी के समाचार पत्रों में अब मरी हुई नीरस हिन्‍दी पढ़ने को मिल रही है। कई समाचार पत्र हिन्‍दी के शब्‍दों के बजाय अंगरेजी शब्‍दों का प्रयोग करते हैं, उन शब्‍दों के लिए भी जो कि हिन्‍दी में पहले से प्रचलित हैं। एक सरल उदाहरण है कुत्ता शब्‍द। आजकल कई समाचार पत्र कुत्ते को कुत्ता लिखने में हिचकते हैं। इसलिए कुत्ते और कुतिया के लिए डॉग और फीमेल डॉग शब्‍द का प्रयोग करते हैं ताकि श्‍वानप्रेमियों और आवारा कुत्तों के मसीहाओं की भावनाओं को ठेस न लग जाए। पर सोचने वाली बात है कि क्‍या अंगरेज़ी में भी डॉग और बिच शब्‍द का प्रयोग किसी मनुष्‍य का अपमान करने के लिए नहीं होता? अंगरेजी की यह लोकप्रिय कहावत “ऑल मेन आर डॉग्स” क्‍या पुरुषों का महिमामण्‍डन करती है? समाचार पत्रों में आजकल गर्भवती के लिए प्रेग्‍नेंट शब्‍द का प्रयोग किया जाता है मानों हिन्‍दी का गर्भवती शब्‍द कोई फूहड़ गाली हो या प्रेग्नेंट होने या गर्भवती होने की प्रक्रिया ही अलग अलग हो। प्रेग्‍नेंट होना सम्‍मान की बात हो और गर्भवती होना धिक्‍कार की। इसी तरह नग्न के लिए न्‍यूड शब्‍द का प्रयोग होने लगा है भले ही वह किसी लाश के लिए ही क्‍यों न हो। बॉलीवुड की अभिनेत्रियां जब अपनी अर्द्धनग्‍न तस्‍वीरें खिंचवाती हैं तो हिन्‍दी के समाचार पत्र उसे न्‍यूड फोटोशूट कहकर सहजता से छाप देते हैं। शायद नंगी तस्‍वीरें कहने का साहस वह नहीं जुटा पाते हैं क्‍योंकि यह उनकी अपनी नैतिकता को कटघरे में खड़ा कर देता है। लोगों में अंगरेज़ी तौर तरीकों का चस्‍का पैदा करने में इस तरह की आयातित शब्‍दावली एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब हिन्‍दी के रखवाले ही हीन भावना से ग्रस्‍त हों तो हिन्‍दी का भला कौन करेगा।
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व्‍यक्‍तिगत जीवन में भी जब कोई यह कहता है कि “मेरी हिन्‍दी वीक है” तो उसका व्‍यंग्यार्थ होता है “मेरी अंगरेजी अच्‍छी है।” वहीं किसी के लिए आपके मुंह से अनायास “आपकी हिन्‍दी बहुत अच्‍छी है” ऐसी प्रशंसा निकल भी जाए तो वह “मेरी तो अंग्रेजी अच्‍छी है” इस व्‍यंजना से बूमरेंग की तरह आपकी ओर ही लौट आती है।
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सतही तौर पर जो हिन्‍दी विरोध दिखाई देता है वह कहीं न कहीं अंगरेजी के उस बढ़ते वर्चस्‍व को भी चुनौती देता है जो हिन्‍दी के साथ साथ प्रादेशिक भाषाओं को भी हाशिए की ओर धकेल रही है। भारत की किसी भी भाषा का शब्‍दकोश उठाकर देखिए तो आपको न जाने कितने शब्‍द संस्‍कृत, हिन्‍दी और उर्दू के मिल जाएंगे। तमिळ, तेलुगु, कन्‍नड़ा,मलयालम और मराठी भी इसका अपवाद नहीं हैं। हिन्‍दी विरोधियों की आलोचना करने से पूर्व हमें हिन्‍दी के प्रति अपनी हीन भावना से उबरने और दूसरी प्रादेशिक भाषाओं को सीखने की ललक पैदा करने की आवश्‍यकता है। क्‍या हमें भी वही न्‍याय चाहिए जो झगड़ालू बिल्‍लियों के साथ बंदर ने किया था या हम उन समझदार बकरियों की तरह पुल पार करें जो एक दूसरे को रास्‍ता देने के लिए झुक गयी थी?